राम मंदिर की रक्षा के लिए जब हजारों भूमिहार ब्राह्मणों ने पंडित अनंतराम के नेतृत्व में लड़ा गया मीर बाकी से युद्ध। मदारपुर का युद्ध 1528 - The Trishool Post

राम मंदिर की रक्षा हेतु सबसे पहला महायुद्ध मदारपुर (वर्तमान चौबेपुर - कानपुर) में 1528 में लड़ा गया था,
एक ओर अत्यंत युद्ध-कुशल, समर्पित, धर्मनिष्ठ हज़ारों हज़ार ब्राह्मणो (जमीदारों) की श्रेष्ठ सेना थी, जिसका नेतृत्व ब्राह्मण सेनापति वीर विक्रमी कुशल योद्धा पंडित अनंत राम कर रहे थे, जिसमें दुबे चौबे तिवारी उपनाम के जमीदार ब्राह्मण (भूमिहार) शामिल थे।
दूसरी औरआधुनिक शस्त्रों (तोपों) से सुसज्जित बाबर व उसकी सेना, जिसका सिपहसालार मीर बाक़ी था।

राणासांगा और उनकी सेना को परास्त कर पानीपत के युद्ध से जीत हासिल कर आगे बढ़ती व रास्ते का हर युद्ध जीतती बाबर की क्रूर एवं आधुनिक तोपों से सुसज्जित सेना से लड़ते हुए पचासों हज़ार ब्राह्मण योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए थे, कहते हैं कि गंगा का पानी लाल हो गया था।
ये ब्राह्मण महायोद्धा मात्र इसलिए लड़े थे तकि बाबर की सेना अयोध्या पहुंचकर राममंदिर नष्ट न करने पाये, इसके अलावा इन्हें किसी राज-पाठ या अन्य किसी भी बात का स्वार्थ न था। इनके लिए धर्म रक्षा सर्वोपरि थी।

नमन है उन वीर हुतात्माओं को।
राम मंदिर का पुनः निर्माण उन धर्मप्राणवीर योद्धाओं को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मदारपुर युद्ध वर्णन


1)पंडित दुर्गा दत्त त्रिपाठी व पंडित मुकुंद राम कृत कान्यकुब्ज वंशावली
2)पंडित मुन्नीलाल मिश्रा कृत कान्यकुब्ज भूषण
3) पंडित हरिप्रसाद भागीरथ द्वारा प्रकाशित बृहद कान्यकुब्ज  दर्पण खेमराज प्रकाशन
4) गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'सतसई' दोहावली  मैं दोहा नंबर 89 मैं भी इसका वर्णन है

और बहुत सारे इतिहासकर्ताओं ने इस युद्ध का वर्णन किया!