सुब्रमण्यम चंद्रशेखर
जन्म : 19 अक्टूबर 1910
जन्मस्थान : लाहौर
सुब्रमण्यम चंद्रशेखर विश्व के उन चुंनिन्दा वैज्ञनिकों में आते हैं। जिन्होंने अपने खोज से विज्ञान की परिभाषा बदल दी है। खगोलीय विज्ञान के क्षेत्र में अगर गणितीय सूत्र को लाने का श्रेय किसी को जाता है। तो वो हैं सुब्रमण्यम चंद्रशेखर। आज के विज्ञान में "ब्लैक होल" का काफी महत्व है। वैज्ञनिक जगत में " ब्लैक होल" को परिभाषित करने और उसके बनने की प्रक्रिया को बताने में सुब्रमण्यम चंद्रशेखर जी हैं। ✅।
→ शुरुआती दिनों में जब सुब्रमण्यम चंद्रशेखर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी( इंग्लैंड) में प्रोफेसर थे। तब उनके देखरेख में 50 विद्यार्थी पी.एच. डी किये थे। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सुब्रमण्यम चंद्रशेखर के 2 शिष्य चीन से थे और उन्हें नोबल भी मिला था। चेन निंग यांग और तसुंग - दाओ- ली उन दोनों के नाम हैं।
→ उस वक्त अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व के जाने माने वैज्ञनिक थे। सुब्रमण्यम चंद्रशेखर उस वक्त अपनी नोट्स पब्लिश करते थे। जिसमे वो अक्सर "ब्लैक होल " के बारे में बात करते थे। अल्बर्ट आइंस्टीन को उन्होंने अपने नोट्स भेजे थे ,जिसको आइंस्टीन ने अस्वीकार कर दिया था। ये कहते हुए की एक पॉइंट मास में " ब्लैक होल" जैसा कुछ हो ही नही सकता।
→सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को शिकागो यूनिवर्सिटी अमेरिका से ऑफर आया और वो अमेरिका में चले गए जहाँ वो काफी समय तक चंद्रशेखर लिमिट में काम किये थे। चंद्रशेखर लिमिट ब्लैक होल को परिभाषित करती है।
→ चंद्रशेखर लिमिट , अगर किसी तारे का मास 1.44 होता है। तो उसे " श्वेत बौने / व्हाइट द्वारफ" कहते हैं। पर जब इसका मास 1.44 से ज्यादा हो जाता है तब वो तारा "ब्लैक होल" में परिवारित हो जाता है। " ब्लैक होल " में ग्रैविटी/ गुरुत्वाकर्षण बहुत रहता है जिसके कारण वो अपने पास आने वाली चीजों को अपने अंदर समाहित कर लेता है।
→ " ब्लैक होल " की विशेषता ये रहती है। की एक बार इसके अंदर कोई वस्तु चली गई तो वो पुनः बाहर नही आ सकती। ब्लैक होल में लाइट भी नही रहती है समय का प्रभाव भी ब्लैक होल में बहुत ज्यादा धीमा होता है। सुब्रमण्यम चंद्रशेखर ने गणितीय रूप में ब्लैक होल को परिभाषित करके विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी थी।
→"ब्लैक होल " के अलावा चंद्रशेखर ने कई खगोलीय क्षेत्र में काम किया है। जैसे " तारो के ठंडा होकर सिकुड़ने के साथ केंद्र में घनीभूत होने की प्रक्रिया" में भी काफी शोध किया है ।
→चंद्रशेखर सुब्रमण्यम ने थ्योरी ऑफ ब्राउनियन मोशन , थ्योरी ऑफ द इल्लुमिनेसन एंड द पोलरिजेसन ऑफ द सनलीट स्काई , सापेक्षता और अपेक्षिकीय खगोल भौतिक के सामान्य सिद्धांत इत्यदि दिए हैं।
→ चंद्रशेखर सुब्रमण्यम रॉयल सोसाईटी के फेलो, ब्रोंज पदक, रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी से स्वर्ण पदक, अमेरिकन अकादमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज से रमफोर्ड पुरुस्कार, भारत सरकार द्वारा पद्मविभूषण इत्यदि से सम्मानित हो चुके हैं।
→ तारो की संरचना और उत्पत्ति से संबंधित शोध के लिए सन 1983 में सुब्रमण्यम चंद्रशेखर को नोबल मिला था। आप लोगो को जानकर आश्चर्य होगा कि सुब्रमण्यम स्वामी मशहूर वैज्ञनिक सी. वी रमन के भतीजे हैं। सी. वी रमन भी नोबल पुरस्कार से सम्मनित हो चुके हैं।
→अमेरिका में कई यूनिवर्सिटी, कई लैब , कई यूनिवर्सिटी की डिपार्टमेंट यहाँ तक नाशा में भी एक डिपार्टमेंट सुब्रमण्यम चंद्रशेखर के नाम में है।
जय सनातन धर्म
हर हर महादेव

